लखनऊ, 04 जून समाजवादी पार्टी(सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ीय जनता पार्टी(भाजपा) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए जाने को सिर्फ एक छलावा बताते हुए कहा कि जब क्रय केन्द्र ही नही है तो अपनी उपज कहां बेचेगा।


श्री यादव ने गुरूवार को यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकार ने हाल में जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए हैं, वह सिर्फ छलावा है। उन्होंने कहा कि जब क्रय केन्द्र नहीं है तो किसान अपनी उपज कहां बेचेगा। सरकारी नीतियों में विसंगतियों के चलते भी किसान परेशान है। मक्का और ऑयल सीड की खरीद ज्यादातर मुर्गी पालन उद्योग में होती है। जब पोल्ट्री उद्योग सरकार ने बंद किया तो मक्का खरीद भी बंद हो गई। किसान की बोई फसल बर्बाद हो गई।


उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के रहते किसानों को कोई आर्थिक लाभ होने वाला नहीं है। जब प्रदेश में ही मण्ड़ियों में उसकी फसल बिक नहीं पा रही है तो वह दूसरे प्रदेशों में बिना सरकारी मदद के कैसे जा पाएगा। भाजपा ने एक ओर समर्थन मूल्य बढ़ाने का नाटक किया तो दूसरी तरफ डीजल और गैस के दाम बढ़ा दिए। रासायनिक खाद, कीटनाशक, बिजली, सिंचाई और बीज के सम्बंध में किसान को कोई रियायत नहीं मिली। भाजपा सरकार में फल-फूल, सब्जी, दूध का काम करने वाले किसान मुश्किलों में फंस गए हैं। किसान से कहा जा रहा है कि वह बैंको से ज्यादा कर्ज ले, किसान को आत्महत्या की ओर प्रेरित करने का यह भाजपाई तरीका है। असल में भाजपा का खेती-किसान से कुछ लेना देना नहीं है। उसकी मानसिकता गरीब विरोधी, किसान विरोधी है।


श्री यादव ने कहा कि राज्य में किसानों की जिंदगी बदहाल होती जा रही है। गन्ना किसानों का लगभग 20 हजार करोड़ रूपया मिलों पर बकाया है। गन्ना बकाये पर कानूनन 14 दिन बाद भुगतान न होने की स्थिति में किसानों को ब्याज की राशि भी मिलनी चाहिए, इस पर सभी मौन साधे हैं। मुख्यमंत्री की मिल मालिकों पर सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है क्योंकि पूंजीघराने ही तो भाजपा के समर्थक हैं। उद्योगपतियों को तमाम छूट और राहत पैकेज देने वाली भाजपा क्रय केन्द्र हो या मिलों के तौल केन्द्र वहां किसानों का सिर्फ लाइन लगवाना जानती है।


उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले पांच माह में किसानों को बे-मौसम बरसात, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने से मुसीबतें उठानी पड़ी हैं, फसलों के नुकसान के साथ मकानों और पशुधन की भी क्षति हुई है। सपा ने किसानों के नुकसान की भरपाई करने और किसानों को दस-दस लाख रूपए मुआवजे में देने की मांग की थी।


श्री यादव ने कहा कि सरकार अपने प्रचार पर जो खर्च विज्ञापनों पर कर रही है वह यदि किसानों और मजदूरों को दे देती तो उनका कुछ तो भला होता। बुंदेलखण्ड और बृजक्षेत्र में सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। खेती को प्राइवेट हाथों में देने की भाजपा साजिश कर रही है, यह किसानों के साथ विश्वासघात है। समाजवादी सरकार में 100 एकड़ की मण्डी का आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे पर कन्नौज में व्यवस्था की थी। मलिहाबाद में आम की मण्डी बनी थी, भाजपा ने इन्हें बंद कर दिया। भाजपा-कांग्रेस की समान आर्थिक नीतियों के कारण किसानों का, गरीबों का भला नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जिस आत्मनिर्भरता की बात करते है उसकी सफलता बिना किसानों के योगदान के सम्भव नहीं है। किसानों की मेहनत और उनकी उपज का लाभकारी मूल्य देना है तो भाजपा सरकार को भण्डारण, संरक्षण की उचित व्यवस्था करनी होगी ताकि अनाज, फल-सब्जी जल्दी खराब न हो। ब्याज पर कर्ज की व्यवस्था समाप्त हो। किसानों को बैंक के बजाय सीधे कार्य पूंजी देने का इंतजाम हो। क्रय केन्द्रों से गेहूं की खरीद हो। बिचैलियों की लूट खत्म की जाए।