नई दिल्ली, 18 जून (वार्ता) समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से पुराना बकाया मांगे जाने को लेकर उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने करीब अपना आदेश वापस ले लिया है।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने पीएसयू से मांगी गयी चार करोड़ रुपये की बकाया राशि में से 96 प्रतिशत हिस्सा न लेने का फैसला किया है और इसके लिए आदेश जारी कर दिया गया है।

इस बीच, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने एजीआर मामले में निजी दूरसंचार कंपनियों के प्रस्ताव पर विचार के लिए मौका दिये जाने के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह के लिए टाल दी है।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति मिश्रा ने गत 11 जून को हुई सुनवाई के दौरान दूरसंचार विभाग (डीओटी) को फटकार लगाते हुए कहा था कि पीएसयू से चार लाख करोड़ रुपये के बकाये की मांग पूरी तरह अनुचित है और विभाग को इसके लिए एक हलफनामा दाखिल करके बताना चाहिए कि ऐसा क्यों किया गया? उन्होंने कहा था, “हमारे फैसले का दुरुपयोग किया जा रहा है।” इसी फटकार के बाद केंद्र ने बकाये भुगतान का आदेश वापस लिया और इस संबंध में आज न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा भी दायर किया।