नई दिल्ली 05 मई विदेशों में फँसे उन के लिए सरकार ने अभी कोई योजना नहीं बनायी है जिनकी आर्थिक स्थिति वाकई दयनीय हो गयी है और वे हवाई किराये का खर्च वहन नहीं कर सकते।


हरदीप सिंह पुरी ने आज एक ऑनलाइन प्रेसवार्ता में बताया कि सात से 13 मई के बीच 12 देशों में फँसे तकरीबन 14,800 लोगों को 64 विशेष उड़ानों से भारत लाया जायेगा। इन यात्रियों को हवाई यात्रा और आने के बाद 14 दिन के अनिवार्य क्वारंटीन का खर्च स्वयं वहन करना होगा।

कोई योजना नहीं, जिनके पास पैसे नहीं हैं उन्हें स्वदेश लाने की अभी कोई योजना नहीं – सरकार


यह पूछे जाने पर कि जो लोग ‘कोविड-19’ महामारी के कारण तीन-चार महीने से विदेशों में बेरोजगार हैं और उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वे हवाई यात्रा का खर्च वहन कर सकें क्या उनके बारे में कोई योजना है, श्री पुरी ने कहा “विदेशों में रहने वाले उन लोगों का मामला अलग है जिनके पास रहने की व्यवस्था नहीं है और जिनकी आर्थिक स्थिति गंभीर है। लेकिन अभी अगर हम यह घोषणा कर दें कि सभी उड़ानें नि:शुल्क हैं तो कई ऐसे लोग जो (किराया) दे सकते हैं वो भी इसका फायदा उठायेंगे। आप जिनकी बात कर रहे हैं उनको देखा जायेगा, लेकिन इस संबंध में जवाब देना मेरे दायित्व क्षेत्र में नहीं है। मैं विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जुड़ा मंत्री नहीं हूँ। मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि हमारे हवाई परिवहन के ढाँचों का हम कैसे उपयोग कर सकते हैं।”


उल्लेखनीय है कि श्री पुरी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन की अध्यक्षता वाले उस मंत्री समूह के भी सदस्य हैं जो कोविड-19 को लेकर स्थिति की निगरानी कर रहा है और सभी महत्त्वपूर्ण फैसले ले रहा है।


श्री पुरी ने बताया कि कम से कम एक लाख 19 हजार लोगों ने अपने खर्च पर स्वदेश वापसी की इच्छा जताई है और पहले सप्ताह में 15 हजार लोगों को लाया जा रहा हैै। उन्होंने कहा कि अमेरिका से आने वाले यात्रियों को तकरीबन एक लाख रुपये, ब्रिटेन से आने वालों को 50 हजार रुपये, फिलिपींस से आने वालों को 30 हजार रुपये, सऊदी अरब से आने वालों को 25 हजार रुपये, मलेशिया से आने वालों को 20 हजार रुपये, सिंगापुर से आने वालों को 18 से 20 हजार रुपये, कुवैत से आने वालों को 14 से 20 हजार रुपये, संयुक्त अरब अमीरात से आने वालों को 13 से 15 हजार रुपये और बंगलादेश से आने वालों को 12 से 15 हजार रुपये प्रति यात्री किराया देना होगा।


इन 14,800 लोगों में 3,150 केरल; 3,100 दिल्ली-एनसीआर; 2,150 तमिलनाडु; 1,900 महाराष्ट्र; 1,750 तेलंगाना; 1,100 गुजरात; 650 कर्नाटक; 600 जम्मू-एवं कश्मीर और दो-दो सौ पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के हैं।


अमेरिका से 2,100, संयुक्त अरब अमीरात से दो हजार, मलेशिया और ब्रिटेन से 1,750-1,750, बंगलादेश से 1,400, फिलिपींस और सिंगापुर से 1,250-1,250, सऊदी अरब और कुवैत से एक-एक हजार, ओमान से 450 तथा कतर और बहरीन से 400-400 भारतीयों को वतन वापस लाया जायेगा।