श्रीनगर 03 मई जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में आतंकवादियाें के साथ मुठभेड़ के दौरान रविवार को सेना के दो अधिकारियों समेत हो गये। शहीद हुए जवानों में सेना का एक कर्नल, एक मेजर और दो सैनिकों के अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक अधिकारी भी शामिल है। इस मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी भी मारे गए हैं।

मुठभेड़ में

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी है। जवानों ने अपने कर्त्तव्यों का पालन करते हुए यह सर्वोच्च बलिदान ऐसे समय में दिया है जब सेना वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में जुटे कोरोना योद्धाओं के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने यूनीवार्ता को बताया कि हंदवाड़ा के चंजमुल्ला के समीप एक मकान में कुछ लोगों को आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाकर रखे जाने संबंधी खुफिया सूचना के आधार पर राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह ने शनिवार की शाम संयुक्त रूप से अभियान छेड़ा था। सुरक्षा बल के जवान लक्षित ठिकाने पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों को बचाया।

इसी दौरान आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने भी गोलियां चलाई जिसके साथ ही मुठभेड़ शुरू हो गयी।

मुठभेड़ में सेना के दो अधिकारी, दो जवान और पुलिस के एक उप निरीक्षक शहीद हो गये। शहीदाें में कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, राष्ट्रीय राइफल्स की 21वीं बटालियन के नायक राजेश और लांस नायक दिनेश तथा पुलिस उपनिरीक्षक शकील काजी शामिल हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दो आतंकवादी भी मारे गए हैं। मारे गए आतंकवादियों में लश्कर का एक शीर्ष कमांडर भी शामिल है।

इस मुठभेड़ के साथ ही लॉकडाउन के लागू होने से लेकर अब तक 20 सुरक्षाकर्मी अपने जीवन का बलिदान दे चुके हैं जबकि इस दौरान 35 आतंकवादी भी मारे गए हैं।

इससे पहले वर्ष 2000 में हंदवाड़ा में हुए एक विस्फोट में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के एक कर्नल और एक अन्य अधिकारी शहीद हो गए थे।