अहमदाबाद, 24 मई (वार्ता) गुजरात हाई कोर्ट ने देश में बड़े कोरोना हॉट स्पॉट में से एक बन कर उभरे इस पश्चिमी राज्य, विशेष रूप से सर्वाधिक प्रभावित अहमदाबाद शहर, में कोविड 19 विषाणु के संक्रमितों के इलाज तथा जांच की मौजूदा स्थिति को लेकर नाखुशी जताते हुए इस स्थिति में सुधार के लिए राज्य सरकार को आज कई आदेश दिये।


न्यायमूर्ति जे बी पारडीवाला तथा न्यायमूर्ति आई जे वोरा की खंडपीठ ने अदालत के स्वत: संज्ञान के आधार पर दर्ज इस मामले को लेकर अपने आदेश में कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी मरीज जांच के बिना अस्पताल से छोड़ा न जाये। ज्ञातव्य है कि पिछले लगभग दो सप्ताह से ऐसे रोगियों को बिना जांच ही छोड़ा जा रहा है जिन्हें लगातार तीन दिनों तक बुखार नहीं आया हो।

, सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी


अदालत ने कई बड़े निजी और कार्पोरेट अस्पतालों में भी कोरोना के इलाज और जांच का प्रावधान नहीं होने पर हैरत जताते हुए राज्य सरकार से एेसे अस्पतालों के साथ इस मामले में एमओयू करने के निर्देश दिये। अदालत ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज की लचर व्यवस्था को लेकर कहा कि वहां वरिष्ठ चिकित्सक वार्ड में नहीं आते और कई अन्य अव्यवस्थाओं के चलते वहां मृत्यु दर अहमदाबाद महानगरपालिका संचालित एसवीपी अस्पताल की तुलना में अधिक है।
अदालत ने अधिक से अधिक जांच सुनिश्चित कराने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देशित किया।

  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी
  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी
  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी
  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी
  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी
  • , सरकार को दिये कई निर्देश – गुजरात में कोराना की जांच और इलाज को लेकर हाई कोर्ट ने जतायी नाखुशी