कोंग्रेस मध्यप्रदेश में संकट में आई अपनी सरकार को बचाने का प्रयास कर रही है. एमपी के कांग्रेसी नेता दिग्गीराजाने बेंगलुरू जा कर होटल में बंद कांग्रेसी विधायको से मिलने का प्रयास किया. जिसे राजनितिक ड्रामा भी कह सकते है. गुजरात में भी स्थिति अच्छी नहीं. गुजरात में कांग्रेस ने राज्यसभा की दो सीटे जीतने के लिये दो प्रत्याशी भरतसिंह माधवसिंह सोलंकी और शक्तिसिंह गोहिल को मैदान में उतारा. लेकिन भाजपा ने कांग्रेस से एक सीट छिनने के लिये कांग्रेस के ही 5 विधायक कम कर दिये. जिससे नंबर गेम में कांग्रेस अब एक ही सीट जीत सकती है. दो में से कीसे मना करे अपना नामांकन वापिस लेने के लिये….? उसे लेकर न सिर्फ गुजरात कांग्रेस में लेकिन राष्ट्रीय स्तर भी ऐसा कुछ भीतराघात के रूप में चल रहा है की गोहिल राज्यसभा चुनाव में न जीते. क्योंकि यदि वे जीतते है तो कांग्रेस में सीधे तौर पर अहमद पटेल पर भारी पड सकते है ऐसा मान कर अहमद पटेल गूट के भरतसिंह ने नामांकन वापिस लेने से मना किया या न किया हौ लेकिन वे इस चुनाव में कीसी भी हद तक जा सकने की खबर से धमासान मचा है.

भरतसिंह को कांग्रेस ने सब कुछ दिया है. विधायकपद से लेकर सांसद और केन्द्र मे मंत्री भी बनाये गये. गुजरात में प्रदेश अध्यक्ष भी बनाये गये. फिर भी कहा जाता है कि इस राज्यसभा चुनाव में भी उन्हो ने टिकिट मांगी. लेकिन जब उन्हे मना कर दिया गया तो वे कहा जा रहा है कि वे कांग्रेस से भाजपा में गये कदावर कांग्रेसी नेता नरहरि अमीन की तरह वे भी अपने कुछ समर्थक विधायको के साथ भाजपा में जाने के लिये तैयार हो गये थे. और भाजपा ज्वोइन करने के लिये घर से निकले भी थे लेकिन कहा जा रहा है कि उन्हें कीसी तरह से कांग्रेस ने मना लिया और जब वे भाजपा में नहीं आये तब तीसरी सीट जीतने के लिये भाजपा ने अमीन को मैदान में उतारा……!?

इस बात का सबूत ये माना जा रहा है कि भाजपा के लिये विधायकपद से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के एक विधायक काकडिया की पत्नी का एक मैसेज वायरल हुआ. जिस में वे कह रही है की उनके पतिने भरतसिंह के कहने से कांग्रेस से इस्तीफा दिया, उनके पति ने सोलंकी से पूछा कि उन्हे भाजपा की ओर से आफर है तो क्या करे….? इस पर सोलंकी ने सलाह दी की हां, उगते सूरज को ही पूजा जाता है. यानि जो सत्ता में है उस में ही जाना चाहिये. और सोलंकी की बात मान कर उनके पति महोदय ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया….! इतना गंभीर आरोप फिर भी सोलंकी की ओर से उसका कोई जवाब या खुलासा नहीं किया गया.

गुजरात कांग्रेस में 66 वर्षिय भरतसिंह सोलंकी अहमद पटेल के निकट या गूट के माने जाते है. 59 वर्षिय गोहिल कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर उभरते सितारे के रूप में माने जा रहे है. वे पेशे से वकील है. हिन्दी भाषा पर प्रभुत्व है. अच्छे प्रवक्ता भी है. संसदिय कार्य प्रणाली से भलीभांति परिचित भी है. क्योंकि वे सिनियर विधायक और सरकार में जूनियर मंत्री भी रह चुके है. उन्हें राहुल गांधी द्वारा लोकसभा चुनाव में बिहार के प्रभारी भी बनाये गये थे. वे भाजपा और खास कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सामना करने के लिये काफी सक्षम और भरतसिंह की तुलना में को ज्यादा सक्षम कहे जाते है. यदि वे राज्यसभा में जाते है तो सटाक से राष्ट्रीय स्तर पर आयेंगे. राज्यसभा में वे कपिल सिब्बल की तरह सरकार का सामना कर सकते है. कानूनी तौर पर भी सिब्बल का विक्ल्प बन सकते है. तो यह सब देखते हुये कांग्रेस में वे धीरे धीरे अहमद पटेल के भी विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हो तब कहा जा रहा है कि उन्हे राज्यसभा चुनाव में हराने के लिये हो अबमद पटेल की ओर शंका की सुई कुछ नेताओ को दिखाइ दे रही है…..!
कहा जा रहा है की भरतसिंह ने राजीव शुक्ला को टिक्ट देने की घोषणा पर अहमद पटेल के इशारे पर भाजपा में जा कर कांग्रेस को तोडने का मन बनाया था और टिक्ट न मिलने पर भाजपा में सामिल होने के लिये भी निकल चुके थे लेकिन फिर शुक्ला का नाम रद्द कर उन्हें वापिस बुला लिया गया और गोहिल का नाम आने पर पटेल-सोलंकी को लगा कि यदि गोहिल जीतते है तो पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर गोहिल छा जायेंगे हो सकता है की वे पटेल का स्थान भी ले ले….ये सब मान कर कुछ विधायको को जिन में काकडिया भी है, उन्हो ने इस्तीफा देकर कांग्रेस दो में से एक ही सीट जीत सके और एक ही सीट के लिये गोहिल नहीं लेकिन सोलंकी ही रहै ऐसी कोई चाल कांग्रेस में अहमद पटेल के इशारे पर चली जा रही होने की चर्चा जोरशोर से चल रही है.

सूत्र बताते है कि यह वही अहमद पटेल है जिन्हें गुजरात में कांग्रेस को बरबाद करनेवाला नेता कुछ संनिष्ठ कार्यकार्ता मानते है. विधानसभा के एक चुनाव के वकत मोदी जब सीएम थे तब उन्हो नें सार्वजनिक तौर पर यह बात मिडिया से कही थी की अहमद पटेल उनके अच्छे मित्र है, और कई बार टेलिफौन पर उनसे बात होती रहती है……!! मोदी के इस कथन को कुछ कार्यकर्ताओ ने इस तरह देखा कि अहमद पटेल मोदी से मिले हुये है और विधानसभा चुनाव में वे भाजपा को जिताने के लिये कुछ सीटो पर कमजोर प्रत्याशी रख कर उन्हे लाभ पहुंचाते है….!! क्योंकि टिक्ट का बंटवारा अहमद पटेल के हाथो में ही रहता है और कुछ तो यहां तक कहते है की गुजरात कांग्रेस में जब तक अहमद पटेल न कहे तब तक पत्ता भी नहीं हिल सकता….! अहमद पटेल और भरतसिंह एक ही गूट के माने जाते है.
राज्यसभा चुनाव के लिये भरतसिंह ने अपना नामांकन वापिस लेने से मना कर दिया तो इसका मतलब कांग्रेस में यह माना जायेंगा कि वे खुद तो हारेंगे साथ में गोहिल को भी हराने का अहमद पटेल का सपना पूर्ण कर एक कंकर से कइ पक्षी मारने का काम करनेवाले है….?यदि गोहिल जीते तो वे अहमद पटेल पर भारी पडेगें इसलिये 26 मार्च को जब परिणाम घोषित हो तो क्या होगा ये तो गोहिल भी नहीं जानते होंगे. लेकिन गुजरात कांग्रेस में दो नेता इसका परिणाम अच्छी तरह से जानते है….!?