नई दिल्ली, 27 मई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों को किराया वहन करने और खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराने सहित कई अंतरिम आदेश गुरुवार को जारी किये।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों तथा कुछ हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनने के बाद महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किये।

न्यायालय ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए उनसे न तो रेल का किराया लिया जाएगा, न ही बस भाड़ा।

न्यायालय ने कहा कि इन मजदूरों के किराये पर आने वाला खर्च संबंधित राज्यों द्वारा साझा किया जायेगा। इतना ही नहीं, विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी मजदूूरों को संबंधित राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। मजदूरों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में प्रचारित-प्रसारित किया जाना आवश्यक होगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रस्थान बिंदु पर इन प्रवासी मजदूरों को खाने पीने की सुविधा संबंधित राज्य उपलब्ध करायेंगे, जबकि यात्रा के दौरान यह सुविधा रेलवे देगी।