नई दिल्ली 27 मई हरियाली और वनस्पति के लिए भारी खतरा माने जाने वाले टिड्डी दल के में संभावित हमले के मद्देनजर इससे निपटने की तैयारी शुरु कर दी गई है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर , भागलपुर के कुलपति अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में वैज्ञानिकों की बुधवार को हुई आपात बैठक में टिड्डी दल के संभावित प्रकोप पर गहन चर्चा की गई और इसके नियंत्रण के लिए ड्रोन से चार कीटनाशकों के छिड़काव की सिफारिश की गई ।

बैठक में कुलपति के अलावा निदेशक अनुसंधान, सहायक निदेशक अनुसंधान, कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एस के रॉय तथा कुछ अन्य लोग उपस्थित थे।

बैठक में बताया गया कि टिड्डी दल का पश्चिमोत्तर में भयंकर प्रकोप देखा गया है जिसने फसलों और पेड़ पौधों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस दल के उत्तर प्रदेश से बिहार में प्रवेश की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व की ओर बढ़ने पर इसके प्रजनन क्षमता में कमी की संभावना है।

, टिड्डी आतंक : बिहार में टिड्डी दल से निपटने की तैयारी शुरु

विश्वविद्यालय के अनुसार पूर्व में ऎसा देखा गया है कि टिड्डी दल के पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में पहुंचने की संभावना कम ही होती है । फिर भी टिड्डी दल बिहार में प्रवेश करता है तो इसके नियंत्रण के लिए चार कीटनाशक दवाओं में से किसी एक का ड्रोन के माध्यम से छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा लोग समूह में आवाज या पटाखे चला कर इसे भगा सकते हैं।

बिहार में इन दिनों दलहन की फसल लगी है। इसके अलावा सब्जियों की फसल लगी है। कीट के हमला होने की स्थिति में इन फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। यह कपास और मिर्च की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचता है।

इस वर्ष दूसरी बार टिड्डी दल ने पाकिस्तान की ओर से राजस्थान में हमला किया है जिसे 27 साल में सबसे घातक माना जा रहा है। इसने गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में फसलों को नुकसान पहुंचने के बाद उत्तर प्रदेश में प्रवेश किया है। रविवार और सोमवार को इसका प्रकोप जयपुर शहर पर भी देखा गया था। इससे पहले दिसंबर में टिड्डी दल का प्रकोप हुआ था।

टिड्डी दल शाम के समय उड़ान भरता है लेकिन झुंड में होने पर यह दिन में भी चलता है। यह करीब 16 से 19 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है और एक दिन में पांच किलोमीटर से लेकर 130 किलोमीटर तक की सफर तय कर सकता है। एक टिड्डी एक दिन में अपने वजन के बराबर भोजन चट कर जाता है।

एक अनुमान के अनुसार एक वर्ग किलोमीटर में करीब चार करोड़ टिड्डी होता है जो एक दिन में 35000 लोगों का भोजन हज़म कर जाता है । पूर्व में टिड्डी के हमले के कारण कई देशों में आपातकाल की घोषणा भी की गई है। जून में नमी के बढ़ने के साथ ही इसके प्रजनन की संभावना काफी बढ़ जाती है ।