26 अगस्त के अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की महाना छठी आज मोहर्रम के दौरान अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाई गयी।

काल की यह छठवीं ऐसी महाना छठी रही जिसमें दूरदराज से आने वाले जायरीनों का टोटा रहा। अलबत्ता स्थानीय लोगों ने सड़कों, मकानों की छतों तथा होटलों की खिड़कियों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और दुआ कर मुक्ति तथा दरगाह शरीफ खोले जाने के लिये दुआ की।

ख्वाजा साहब की महाना छठी की फातहा का विशेष कार्यक्रम दरगाह के आहता ए नूर शुरु हुआ। पासधारक चुनिंदा खादिमों ने ही महाना छठी की सांकेतिक रस्में अदा कर मुल्क में अमनोअमान एवं खुशहाली की कामना की। छठी में भाग लेने पहुंचे आशिकाना ए ख्वाजा ने गली मोहल्लों में ही खड़े रहकर हाजरी लगाई।

उधर मोहर्रम के चलते मंगलवार रात अलम पेश करने की रस्म भी निभाई गई। मोहर्रम पर 72 घंटों के लिये खोला गया बाबा फरीद का चिल्ला भी गुरुवार तड़के बंद कर दिया जायेगा।