नयी दिल्ली, 29 अप्रैल देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) का संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है तथा इसके संक्रमितों की संख्या 33 हजार को पार कर चुकी है लेकिन राहत भरी बात यह है कि पीड़ितों के स्वस्थ होने की दर में निरंतर इजाफा जारी है और गुरुवार को यह बढ़कर करीब 24.91 फीसदी पर पहुंच गयी।

देश में कोरोना संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर बुधवार को 24.52 प्रतिशत थी जबकि मंगलवार को यह 23.44 फीसदी थी। सोमवार को 22.53 फीसदी थी जबकि पिछले शनिवार को यह 20.88 फीसदी थी। यह दर वैश्विक महामारी से जूझ रहे विश्व के कई देशों की तुलना में काफी बेहतर है।

संक्रमितों देश में कोरोना

राहत की एक और बात यह है कि संक्रमितों में मृत्यु दर 3.1 फीसदी पर ही बनी हुयी है। गुरुवार को मरीजों के ठीक होने की दर बढ़कर लगभग 25 फीसदी पर पहुंच गयी जबकि रोगियों की मृत्यु दर पहले की तरह 3.1 प्रतिशत पर ही बनी हुई है।

देश में बुधवार शाम से अब तक 1823 नये मामले सामने आने के साथ ही संक्रमितों की संख्या 33 हजार से अधिक हो गयी तथा इसके कारण 67 लोगों की मौत होने से मृतकों की तादाद 1075 हो गयी है।

देश के 32 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस के अब तक कुल 33610 मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें 111 विदेशी मरीज शामिल हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के स्वस्थ होने की रफ्तार भी तेज हुई है और पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमित 576 लोगों के स्वस्थ होने के साथ ऐसे लोगों की संख्या 8373 तक पहुंच गयी।

कोरोना वायरस संक्रमितों के ठीक होने की दर 25 % 1
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पिछले तीन दिनों में देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले दोगुने होने की दर बढ़कर 11.3 दिन हो गई है जो कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के केन्द्र के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। कोरोना वायरस से मरने वालों का वैश्विक औसत सात प्रतिशत है जबकि यह भारत में मात्र 3़ 1 प्रतिशत है।

गौरतलब है कि लॉकडाउन से पहले देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के दोगुना होने की दर 3़ 2 दिन थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल ने आज यहां बताया कि 14 दिन पहले देश में कोरोना मरीजों के ठीक होने का आंकड़ा 13़ 06 प्रतिशत था जो अब लगभग 25 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा देश में कोरेाना वायरस के संक्रमण से मरने वाले मरीजों की संख्या 3़ 1 प्रतिशत है जिनमें से 65 प्रतिशत पुरुषों और 35 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। इनमें से 78 प्रतिशत मौतें सह-रुग्णता यानी को-मोर्बिडिटी की वजह से हुई है, इनमें मरीजों को पहले से ही दिल, गुर्दों, मधुमेह, उच्च रक्त चाप और अस्थमा संबंधी दिक्कतें थीं।