नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सामूहिकता का इजहार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 9 मिनट वाली अपील की ने तीखी आलोचना की है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि लाइट बंद कर कैंडल जलाने और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कोई रिश्ता नहीं है। वहीं, बी. के. हरिप्रसाद ने इसे बकवास करार दिया है। दूसरी तरफ, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वह देश के लोगों के प्रति एकजुटता के इजार के दीया जलाएंगे। हालांकि,उन्होंने पीएम मोदी की आलोचना भी की।

पीएम मोदी

थरूर ने कहा, ‘मैं भारत के लोगों के प्रति एकजुटता के इजहार के लिए दीया जलाऊंगा। लेकिन मेरे लिए यह देखना निराशाजनक है कि प्रधानमंत्री ने अपना पूरा भाषण इसी पर केंद्रित रखा। देश उनसे बहुत ज्यादा की उम्मीद कर रहा था। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जहां पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है, वहीं समाज के कुछ दुश्मन इस लड़ाई को अपनी हरकतों से नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं। अब ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस के एक अन्य नेता बी.के. हरिप्रसाद ने तो पीएम मोदी की अपील को बकवास करार दिया है।

उन्होंने कहा, ‘मोमबत्ती जलाओ नया थाली बजाओ है! पूरी तरह बकवास!’ हरिप्रसाद ने कहा प्रवासी मजदूरों या फिर सैकड़ों किलोमीटर चलने वालों के लिए कोई उपाय नहीं सुझाये गए।’ उन्होंने कहा सरकार ने कोविड से लड़ने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एक शब्द नहीं बोला,जोकि पूरी तरह जवाबदेही से भागना है। दरअसल पीएम मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों से वीडियो संदेश साझा कर अपील की है कि 5 अप्रैल को यानी अगले रविवार को रात 9 बजे से 9 मिनट तक लाइट बंद कर दीये, टॉर्च, मोमबत्ती या मोबाइल का फ्लैश लाइट जलाकर सामूहिकता का इजहार करें।

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इस पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘लाइट बंद करने और मोमबत्ती जलाने का कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई से कोई संबंध नहीं है। मेरा तो यही मानना है और मैं न तो मोमबत्ती जलाऊंगा और न ही लाइट बंद करूंगा। हां, कोरोना के खिलाफ लड़ाई को समर्थन जारी रहेगा। अगर मैं मोमबत्ती नहीं जलाऊंगा तो मुझे देशविरोधी ठहराया जाएगा, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।
कांग्रेस
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एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी पीएम मोदी की अपील की आलोचना करते हुए इसे नौटंकी करार दिया है। ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘यह देश कोई इवेंट मैनेजमेंट कंपनी नहीं है। भारत के लोग इंसान हैं और उनके भी सपने हैं, उनकी भी उम्मीदें हैं। प्रधानमंत्री, हमारी जिंदगियों को 9 मिनट की नौटंकी तक सीमित मत कीजिए। हम यह जानना चाहते हैं कि राज्यों को क्या मदद मिलेगी और गरीबों को क्या राहत दी जाएगी। इसके बजाय हमें नया नाटक मिल रहा ह

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